हजरत बसर हाफी की पहले की ज़िन्दगी hazrat basar hafi

हजरत बसर हाफी की पहले की ज़िन्दगी hazrat basar hafi Islamic stories in hindi Allah ka mehboob banda अल्लाह का मेहबूब बन्दा इश्के इलाही Ishqe ilahi
Sakoonedil

हजरत बसर हाफी की पहले की ज़िन्दगी hazrat basar hafi Islamic stories in hindi


हजरत बसर हाफी रहमातुल्लाह अलै अपनी पहली जिन्दगी मे एक बहुत बड़े शराबी थे आप एक मर्तबा शराब के नशे और मस्ती के आलम मे कहीं जा रहे थे कि रास्ते मे आपने एक कागज का टुकड़ा देखा जिसपर बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम लिखा हुआ था हजरत बसर ने उस कागज पर अल्लाह का नाम लिखा हुआ देखकर ताजीमन उसे उठा लिया और अतर खरीद कर उसे मुअत्तर किया और फिर उसे एक बुलंद जघा पर रख दिया उसी रात एक बुजुर्ग ने खुवाब मे सुना कि कोई कह रहा है कि जाओ बसर हाफी से कहदो कि तुमने मेरे नाम को मुअत्तर किया उसकी ताजीम की और उसे बुलंद जघा पर रखा हम भी तुझको पाक करेंगे और दुनिया वा आखिरत मे तुम्हे बुजुर्गी अता फरमाएंगे और बुलंद मुकाम अता फरमाएंगे उन बुजुर्ग के दिल मे सोचा कि बशर तो एक शराबी और फासिक शख्स है शायद मैंने ये खुवाब गलत देखा है चुनानचे उन्होंने वजू किया और नफल पढ़े और फिर सो रहे दूसरी बार उन्होंने फिर वही खुवाब देखा उसी तरह तीन मर्तबा यहि नज़र आया और यहि आवाज आया कि ये हमारा पैगाम बशर ही की तरफ है जाओ उसे हमारा ये पैगाम पहुंचा दो,


चुनानचे सुबह हुई तो वोह बुजुर्ग हजरत बशर की तलाश मे निकले उनको पता चला कि वोह शराब की मजलिस मे बैठे हैँ तो वोह वही पहुचे और बसर को आवाज दी लोगों ने बताया कि वोह शराब के नशे मे बेहोश पड़े हैँ उन्होंने कहा कि तुम लोग जाकर किसी तरह उसे ये बात सुना दो कि तुम्हारे नाम एक जरुरी पैगाम आया है और पैगाम लाने वला बाहर खड़ा है चुनानचे वोह लोग गये और हजरत बशर से जाकर कह दिया कि उठो बाहर चलो तुम्हारे नाम कोई पैगाम आया है हजरत बशर ने फरमाया कि उनसे जाकर पूछो कि वोह किसका पैगाम लाये हैँ वोह बुजुर्ग फरमाने लगे कि मैं खुदा ताला का पैगाम लाया हूँ किया खबर कि पैगाम अताब अमेज है या अकाब आलूदा फिर बाहर अये और पैगाम हक सुनकर सच्चे दिल से तोबा की और उस बुलंद मुकाम पर जा पहुचे कि मुशाहदा हक के गलबा की सिद्दत से बृहना पैर रहने लगे और कभी जूता पाओं मे ना पहना और इसी लिये आप, हाफी, के नाम से मशहूर होगये कि हाफी नंगे पाओं वाले को कहते हैँ लोगों ने आपसे पूछा कि आप जूती कियों नहीं पहनते तो फरमाया हक ताला फरमाता है कि मैंने जमीन को तुम्हारा बिछोना बनाया है पस बादशाह के बिछाये हुऐ बिछोने पर जूती पहने जाना बे अदबी है,

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