हजरत जुनेद बगदादी का वाक्या hajrat Juned Baghdadi Ka Waqya

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 अदाइगी अमानत का वाक्या Adaigi Amanat Ka Waqya

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हजरत जुनेद बगदादी फरमाते हैँ कि एक मर्तबा मे जामा मस्जिद मे था नागहाँ एक शख्स हमारे पास आया और दो रकात नमाज अदा करके मस्जिद के एक कोने मे लेट गया और मुझे इशारा से बुलाया और कहा अये अबु अलक़ासिम अल्लाह ताला की और अहबाब की मुलाकात का वक़्त करीब आगया है जब मैं फारिग हो जाऊ तो आपके पास एक जवान कव्वाल आयेगा उसको मेरी गदड़ी असा और लोटा देदो मैंने कहा कव्वाल? ये कियोंकर हो सकता है फरमाया वोह मेरी कायम मुकामी के मर्तबा पर पहुंच गया है हजरत जुनेद फरमाते हैँ जब उस शख्स का इन्तेकाल हो गया और हम उसको दफना चुके तो एक जवान मिश्री हमारे पास आया और बाद सलाम के कहने लगा हमारी अमानत कहाँ है अये अबु अल क़ासिम मैंने कहा कैसी अमानत किया किस्सा है बयान करो कहा कि मैं फलां कौम के घाट पर था कि मुझे हातिफ ने निदा दी कि जाओ और जुनेद के पास जो कुछ है लेलो और उसके पास ये ये चीज है और तू फलां फलां अबदाल के कायम मुकाम किया गया हजरत जुनेद फरमाते हैँ मैंने ये सुनकर वोह अश्या उसके हवाला करदी उस शख्स ने उसी वक़्त अपने कपडे उतारे और ग़ुस्ल करके गदड़ी पहनी और वैसे ही शाम की तरफ रवाना हो गया,


गीबत मुआफ़ करवाने का किस्सा Gibat Muaf Karwane Ka Kissa


हजरत जुनेद फरमाते हैँ मैं मस्जिदे शुनेज्या मे बैठा एक जनाजे की नमाज का मुन्तजर था अहले बगदाद अपने दरजो मे बैठे जनाजे का इन्तेजार कर रहे थे मैंने एक फकीर देखा उसमे आसारे इबादत जाहिर थे लोगों से सवाल कर रहा था मैंने अपने दिल मे कहा कि अगर ये शख्स कोई अमल करता जिसकी आमदनी अपने आप को सवाल करने से बचाता तो किया खूब था जब मैं अपने घर वापिस आया रात को कुछ वाजीफा मुझको पढ़ना था कुछ नवाफ़िल कुछ आह वा जारी उसके सिवा और कुछ बाकी ना था मुझपर ये सब गिराँ और दुस्वार गुजरा मगर मैं बैठा जागता रहा उसी हालत मे नींद ने गलबा किया और मैं सो रहा खुवाब मे उस फकीर को जो लोगों से सवाल कर रहा था देखा एक खुवान बिछा हुआ है उसपर उसी फकीर को लाकर बिठाया मुझसे कह रहे हैँ तू इसका गोस्त खा तूने इसकी गीबत की है उसी हालते खुवाब मे मुझे उसका सब हाल जाहिर किया गया मैंने कहाँ मैंने तो उसकी कभी गीबत नहीं की अल बत्ता जी मे कहा है मुझसे कहा तू उन लोगों मे से नहीं कि ऐसी ख़फ़ीफ़ बातें हम तुझसे पसंद करें जा उस फकीर से अपना कुसूर मुआफ़ करा जब सुबह हुई मैं उसकी तलाश मे फिरने लगा यहाँ तक कि मैंने देखा उसको एक जघा तरकारी धोने से पानी मे जूते गिर जाते हैँ उठा रहा था मैंने सलाम किया कहा अये अबु अल क़ासिम फिर ऐसी तकसीर करोगे और दूसरे बंदगाने खुदा का ऐब निकालोगे? मैंने कहा फिर ऐसा ना करूँगा कहा खुदा हमको और तुमको बख्स दे,

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Thanks for reading: हजरत जुनेद बगदादी का वाक्या hajrat Juned Baghdadi Ka Waqya, Sorry, my Hindi is bad:)

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