यकीन पुख्ता करने का वाक़्या Yakeen Pukhta Karne Ka Waqya Poem

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शैख फतेह मूसली बयान फरमाते हैँ कि मैंने जंगल मे एक लड़का ना बालिग देखा और उसके लब हिल रहे थे मैंने सलाम किया उसने जवाब दिया फिर मैंने सवाल किया साबजादे कहाँ जा रहे हो? कहा बैतूल्लाह को जाता हूँ मैंने पूछा किन अल्फाज के साथ अपने लबों को हरकत देते हो? कहा क़ुरआन के साथ मैंने कहा अभी तक तुमपर तकलीफ का कलम नहीं चला कहा मैं मौत को देखता हूँ कि मुझसे छोटों को ले रही है फिर मैंने कहा तुम्हारे कदम छोटे हैँ और राह दूर है? कहा मुझपर कदम उठाना और खुदा पर मंजिल मक़सूद पर पहुंचाना है मैंने कहा तोसा और सवारी कहाँ है? कहा तोशा मेरा यकीन और सवारी मेरे पाओं हैँ, कहा मैं तुमसे पूछता हूँ कि रोटी पानी कहाँ है? कहा अये चचा कोई मखलूक मेसे तुमको अपने घर बुलाये किया तुम मुनासिब है कि अपने साथ तोशा उसके घर ले जाओ मैंने कहा नहीं कहा मेरा सरदार बन्दों को अपने घर बुलाता है और उनको घर के जियारत की इजाजत दी है उनके जाफे यकीन ने उन्हें तोशा लेने पर अमादा किया और मैं ये बुरा जानता हूँ अदब का लिहाज करता हूँ किया तुम्हे गुमान है कि वोह मुझे जाया वा बर्बाद कर देगा मैंने कहा हरगिज नहीं फिर लड़का मेरी नजरों से गायब हो गया फिर मैंने उसे मक्का मे देखा और उसने भी मुझे देखा और कहा अये शैख तुम अभी जाफे यकीन ही पर हो,

हयाते अब्दी Hayate Abdi 

हजरत फतेह मूसली का वाक़्या है कि एक शकिस्ता हाल नौ जवान से मस्जिद मे आपकी मुलाकात हुई तो उसने अर्ज किया कि मैं एक मुसाफिर हूँ और चुंकि मुकीम लोगों पर मुसाफिर का हक होता है इसलिये मैं ये कहने हाजिर हुआ हूँ कि कल फलां मुकाम पर मेरी मौत वाक्य होगी लेहाजा आप ग़ुस्ल देकर इन्ही बोशीदा कपड़ो मे मुझे दफन करदे चुनानचे जब अगले दिन आप वहाँ तशरीफ़ ले गये तो उस नौ जवान का इन्तेकाल हो चुका था और आप जब उसकी वसीय्यत के मुताबिक अमल करके कब्रिस्तान से वापिस होने लगे तो क़ब्र मेसे आवाज आई कि अये फतेह मूसली कि अगर तुझे कुर्बे खुदा वंदी हासिल हो गया तो मैं आपको उसका सिला दूंगा फिर कहा कि दुनिया मे यूँ जिन्दगी बशर करो कि हयाते अब्दी हासिल हो जाये,

नियामते खुदा वंदी को कबूल करना Niyamte Khuda Wandi Ko Kabool Karna 

एक मर्तबा किसी ने हजरत फतेह मूसली की खिदमत मे 50 दिरहम नजराना पेश करते हुऐ अर्ज किया कि हदीष मे ये आया है कि जिसको बगैर तलब के कुछ हासिल हुआ अगर वोह कबूल ना करे तो उसको नियामते खुदा वंदी का मुनकर कहा जायेगा ये सुनकर आपने उस मेसे सिर्फ एक दिरहम उठा लिया ताकि कुफराने नियामत ना हो

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Thanks for reading: यकीन पुख्ता करने का वाक़्या Yakeen Pukhta Karne Ka Waqya Poem, Sorry, my Hindi is bad:)

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