हजरत अबुल हसन नूरी को अचानक कतल करने का हुक्म

हजरत अबुल हसन नूरी को अचानक कतल करने का हुक्म waliyo ki jmat ko khalifa ne katl ka hukm diya
Sakoonedil

 हजरत अबुल हसन नूरी को अचानक कतल करने का हुक्म 

हजरत अबुल हसन नूरी को अचानक कतल करने का हुक्म


एक मर्तबा गुलाम खलील ने बुजुर्ग दुश्मनी मे खलीफा से ये शिकायत करते हुऐ कहा कि यहाँ एक ऐसा गिरोह पैदा हो चुका है जो रक्स वा सुरूर की महफिले मुनअकद करता है इशारों मे बात करता है और जुबान से ऐसी बात निकालता है जिसकी सजा कम अजकम मौत है खलीफा ने बगैर सोचे समझे ये हुक्म जारी कर दिया कि तमाम माशाइखिन को फ़ौरी तोर पर क़त्ल कर दिया जाये चुनानचे हुक्म की तामील करने के लिये करवाई फ़ौरी तौर पार शुरू करदी गई जल्लाद जब सबसे पहले जब हजरत अरकाम को क़त्ल करने के लिये आगे बढ़ा तो हजरत नूरी मुस्कुराते हुऐ उनकी जघा जा बैठे उसपर लोगों ने हजरत से कहा अभी तो आपका नंबर नहीं आया फिर आप हजरत अरकाम की जघा कियों आ बैठे हैँ हजरत नूरी मुस्कुराते हुऐ फरमाने लगे मेरी बुनियाद तरीकत और जज्बा एशार पर कायम है और मैं मुसलमानो की जान के बदले मे अपनी जान देना ज़ियादा बेहतर तसव्वर करता हू हालांकि मेरे नजदीक दुनियां का एक लम्हा महसर के हजार साल से अफजल है कियोकि दुनियां मुकामे खिदमत है और उकबा मुकामे कुर्बत है लेकिन खिदमत के बगैर कुर्बत का हुसूल ना मुमकिन है,


हजरत नूरी के जुबानी ये अजीब वा गरीब कलमात सुनकर काजी से खलीफा ने सवाल किया कि इनके बारे मे किया शरई हुकुम है? काजी ने वहाँ पार मौजूद हजरत सिबली को दीवाना तसव्वर करते हुऐ सवाल किया कि बीस दीनार पर कितनी जकात होती है? हजरत सिबली ने फरमाया साढ़े बीस दीनार यानि आधा दीनार और इस जुर्म मे अदा करे कि उसने बीस दीनार जमा कियों किये जिस तरह हजरत अबू बकर के पास चालिस दीनार थे और उन्होंने सबके सब जकात मे दें दिए थे फिर काजी ने हजरत नूरी से सवाल किया जिसका उन्होंने जवाब देकर काजी से सवाल किया कि अब तुम भी सुनलो खुदा ने ऐसे बन्दे भी तखलीक फरमाये हैँ जिनकी हयात वा ममात और क्याम वा कलाम सब उसी के मुशाहिदे से वाबस्ता हैँ और अगर एक लम्हे के लिये भी वोह मुशाहिदे से मेहरूम रहे तो मौत वाकय हो जाये और यही वोह लोग हैँ जो उसी के सामने रहते हैँ इसी से खाते हैँ इसी से सुनते हैँ और उसी से तलब करते हैँ ये जवाब सुनकर काजी ने खलीफा से कहा कि अगर ऐसे अफराद भी नजदीक हो सकते हैँ तो फिर मेरा फतवा ये है कि पुरे आलम मे कोई भी मोखज नहीं है और जब खलीफा ने उन हजरात से कहा कि मुझसे कुछ तलब कीजिये तो सबने यही जवाब दिया कि खलीफा हमारा यही खुवाहिश है कि आप हमें फ्रामोश करदें ये सुनकर खलीफा पर रक्त तारी हो गई और उसने सबको ताजीम वा एहतेराम के साथ रुखसत किया,

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Thanks for reading: हजरत अबुल हसन नूरी को अचानक कतल करने का हुक्म, Sorry, my Hindi is bad:)

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