हज़रत अबु रोयम का फिक्र और मर्तबा

हज़रत अबु रोयम का फिक्र और मर्तबा Hazrat Abu Royam Ka Fiqr Aur Martba Sufi Buzurg Auliya Allah
Sakoonedil

हज़रत अबु रोयम का फिक्र और मर्तबा 

हज़रत अबु रोयम का फिक्र और मर्तबा


एक दफा का वाक़्या है कि शैख़ अबु उमर वजजाज सूफी बगदाद आये और शैख़ जुनेद बगदादी के पास क्याम किया अबु उमर वजजाज का इरादा था कि वोह अबु मोहम्मद रोयम से मुलाक़ात करें लेकिन वोह ये नहीं चाहते थे कि रोयम से जुनेद बगदादी की इजाजत के बगैर मुलाक़ात करें उन्होंने खासा वक़्त जुनेद के पास गुजार दिया लेकिन इजाजत नहीं हासिल कर सके कुछ दिनों के बद अबु उमर वजजाज को साफ महसूस होने लगा कि जुनेद खुद भी ऐसी सूरत पैदा कर देते हैँ कि अबु उमरो उस सिलसिले मे कोई बात ना कर सकें जुनेद ऐसा कियों चाहते हैँ उसे कुछ पता ना था एक दिन दोपहर के खाने के बाद जुनेद ने आराम करने का इरादा किया उस वक़्त वहाँ कोई और ना था शैख़ जजाज ने आगे बढ़ कर अपनी जुबान खोली और कहा बाबा जुनेद मैं आपसे इजाजत चाहता हू जुनैद ने बात टालदी और कहा मैं जानता हू कुछ दिन सब्र कर फिर उस मौजू पर भी बात हो जायेगी जजाज उस वक़्त तो चुप हो गये लेकिन दूसरे दिन फिर वही सवाल कर दिया बोले हजरत मैं आपसे जिस किस्म की बात करना चाहता हू किया आप जानते है जुनेद ने जवाब दिया तूने कल या परसो भी तूने इसी मौजू पर बात करना चाही थी लेकिन नहीं कर सका था मेरे पास फिर वही जवाब है कि फिलहाल सब्र कर और परेशानी मे मुबतिला ना हो और ना हमें परेशान कर जजाज फिर खामोश हो गये लेकिन चन्द घंटो के अंदर जजाज ने अर्ज किया हजरत मैं हैरान हू आप मुझे पूरी बात कियों नहीं करने देते जुनेद ने पूछा सुभानअल्लाह मैंने तुमको या किसी और को कहीं आने जाने से कहाँ रोका है जजाज ने अर्ज किया हजरत मैं अबु मोहम्मद रोयम से मिलना चाहता हू लेकिन सिर्फ इस ख्याल से नहीं जाता कि आप कहीं मेरी इस हरकत से नाराज ना हो जाये कियोकि यहाँ के लोगों ने मुझे बताया है कि आपने अबु मोहम्मद रोयम से मुलाक़ात को पसंद नहीं किया जुनेद ने पूछा मैं किया पसंद नहीं करता? जजाज ने जवाब दिया कि कोई अबु मोहम्मद रोयम से मुलाक़ात करे और बल खुसूस वोह लोग जो आपके पास आते जाते हैँ जुनेद खामोश रहे कोई जवाब नहीं दिया जजाज चन्द दिनों के लिये खामोश हो गये उन्होंने कई बार इजाजत लेने के लिये जुबान खोली मगर चुप हो गये उसका एक सबब ये था कियोकि वोह जानते थे कि इजाजत फिर भी नहीं मिलेगी,



एक दिन जजाज बाजार से जा रहे थे कि एक सूफी से मुलाक़ात हो गई उसने उनसे पूछा कि अबु उमरो किया मोहम्मद अबु रोयम से मुलाक़ात करली जजाज ने जवाब दिया नहीं मैं अभी तक वहाँ नहीं जा सका सूफी ने कहा आपको उनसे जरूर मिलना चाहिए कियोकि रोयम जैसी नादिर सूफी हस्ती मुश्किल से कहीं मिलेगी जजाज के तमन्ना मे और इजाफा हो गया और आन की आन मे ये फैसला कर लिया कि वोह रोयम से मुलाक़ात जरूर करेंगे और इस सिलसिले मे जुनेद से इजाजत भी नहीं लेंगे सूफी ने पूछा किया सोचने लगे जजाज उन्होंने जवाब दिया कि मैं सोच रहा था कि मैं वहाँ किस तरह जाऊ मेरा क्याम जुनेद के पास है और शाह जुनेद को ये पसंद नहीं कि उनकी सोहबत मे उठने बैठने वाला कोई शख्स रोयम से मुलाक़ात करे सूफी ने हँसते हुऐ कहा तो इसका ये मतलब हुआ कि आप रोयम से मुलाक़ात नहीं कर सकेंगे जजाज ने जवाब दिया नहीं इस सिलसिले मे मैं जुनेद बगदादी को कुछ बताये बगैर ही रोयम के पास चला जाऊंगा बाद मे उन्हें मालूम भी हो गया तो परवाह नहीं सूफी ने कहा हजरत सोचले आप बाद मे कोई मुसीबत ना खड़ी हो जाये जजाज ने फैसला कर लिया कि वोह इसी वक़्त रोयम के पास जायेंगे चुनानचे वोह बाजार ही से रोयम की तरफ रवाना हो गये उस वक़्त रोयम के दरबार मे बाहर से आये हुऐ कई सूफी भी मौजूद थे जजाज इस मजलिस मे एक तरफ बैठ गये और आपकी बातें सुनने लगे उसवक़्त आप मजलिस मे सवाल वा जवाब मे बिजी थे लोग खड़े होकर आपसे सवाल कर रहे थे और आप उन्हें जवाब दे रहे थे,



एक शख्स ने खड़े होकर अर्ज किया हजरत अगर मैं चाहूं तो सवालों की बउछाड़ कर सकता हू लेकिन इस वक़्त मैं ये महसूस कर रहा हू कि आप इस वक़्त कुछ थके थके से दिखाई दे रहे हैँ किया मैं आपसे ये पूछ सकता हू कि ऐसा कियों है? आपका मिजाज कैसा है? अबु मोहम्मद रोयम ने जवाब दिया और तुरंत जवाब दिया उस शख्स का मिजाज या हाल किया पूछते हो जिसका दीन उसकी खुवाहिश हो जिसकी हिम्मत उसकी दुनियां हो ऐसा शख्स ना तो नेक बख्त मुत्तकी हो सकता है और ना आरिफ और पाकीजा खू जजाज को इस अवाज मे जादू जैसा असर महसूस हो रहा था रोयम ने हाजरीन से मुख़ातिब होकर बोलना शुरू कर दिया आपने फरमाया कि मैं तो शुरू से कह रहा हू कि मुआर्फ़त ही असल शै है जैसा कि क़ुरान मे है हमने जिन वा इन्सान इबादत के लिये पैदा किये हैँ, आप चुप हो गए उस रोज आपकी नजर जजाज पर पड़ गई आप उन्हें देख कर मुस्कुराये और अपनी बात जारी रखी कहने लगे कि इंसानों मे वोह लोग भी हैँ जिन्हे अल्लाह की हुजूरी हासिल है उनकी तीन किस्मे होती हैँ इनमे अव्वल वोह हैँ जिनको शायद वहीद कहा जाता है और यही वोह लोग हैँ जिनपर हैबत तारी रहती है दोम वोह हैँ जिन्हे शायद वादद कहा जाता है और ये वोह हैँ जो हमेशा आलमे गियोबत मे रहते हैँ किसी ने बेचैनी से दरियाफ्ट किया कि तीसरे कौन हैँ आपने फरमाया कि तीसरे वोह हैँ जो शायद हक कहलाते हैँ और यही हैँ जो हर वक़्त मसरूर और मगन रहते हैँ,


इसके बाद जजाज को मुख़ातिब किया आये अबु उमरो यहाँ किया लेने आये हो अबु उमरो ने जवाब दिया हजरत आपसे मिलने आया हू आपने फरमाया किया इजाजत ले ली थी अबु उमरो को शर्मिंन्दगी हो रही थी जवाब दिया जिस तरह मेजबान के लिये कुछ शरायत मुकर्रर हैँ उसी तरह महमान पर कुछ जिम्मेदारियां और फ्राइज वाज़िब हैँ और इन्सान होने के नाते उन्हें पूरा करना उनपर कायम रहने के पाबंद हैँ आपने फरमाया मैंने कब कहा तुम इसकी पाबन्दी ना करो लेकिन मैं तो ये चाहता हू कि एक दर्वेश दूसरे दर्वेश को तीसरे दर्वेश की मुलाक़ात से अलग कियों रखना चाहता है जजाज ने जवाब दिया इसका हजरत मैं किया जवाब दूंगा जुनेद बगदादी ही इसका जवाब दे सकते हैँ आपने फरमाया हाँ वही मेरे इस सवाल का जवाब देंगे वही इसकी वजाहत मे कुछ फरमाएंगे मैं उनसे इसका जवाब मागूंगा कुछ देर बाद मजलिस खतम हुई और आप जजाज को अपने हुजरे मे ले गये फरमाया तुम तो काफी दिनों से इस शहर मे रह रहे हो जजाज ने जवाब दिया बेशक़ आपका इरशाद बजा है मगर इसके आगे इस मौजू पर कोई बात ना कीजियेगा कियोकि मुझे इससे शर्मिंन्दगी होगी,



रोयम ने उनकी बात मानली और दूसरी बात करने लगे आपने फरमाया आये जजाज अल्लाह ताला की नियामतो मे कौल और फाल बड़ी नियामत है जिसको ये दोनों नियामते मिल जाये वोह बड़े खुश किस्मत होते हैँ ये दाखले सआदत होते हैँ अगर इन्सान से कौल को सलब कर लिया जाये और फअल को बाकी रखा जाये तो ये इन्सान के हक मे नियामत होगी लेकिन अगर मुआमला अलग हो यानि फअल को सलब कर लिया जाये और कौल को बहाल रखा जाये तो ये इन्सान के हक मे बड़ी मइसत होगी जजाज ने पूछा कि अगर कौल और फअल दोनों को सलब कर लिया जाये आपने फरमाया कि अगर बद किस्मती से ऐसा हो जाये तो समझ लो कि उस इन्सान के लिये यहीं हलाकत है जजाज को आपकी बातों मे बड़ा मजा आरहा था कहा हजरत कुछ और इरशाद फरमाये रोयम ने फरमाया जजाज आज मैं तुम्हें निहायत ही अहम बातें बताना चाहता हू कयामत के दीन सब इंसानों को पुल सिरात से गुजारा जायेगा तो वहाँ दूसरों से ज़ियादा सुफियों को बड़ी मुश्किल होगी जजाज ने अर्ज किया लेकिन हजरत आम इंसानों की निस्बत सूफी तो ज़ियादा दिनदार और अल्लाह का ताबे होता है फिर उसको कियों मुश्किल पेश आएगी,,,



रोयम ने जवाब दिया दूसरी जमातो के लोगों से जाहरी शरियत के मुताबिक पूछा जायेगा और सुफिया से बातिन के मुताबिक पूछा जायेगा जजाज ने कहा हजरत मैं एक मुसाफिर हू आप मुझे सफर के आदाब बताये आपने जवाब दिया आदाबे सफर की बुनियादी चीज ये है कि किसी किस्म का खतरा मुफाफिर के लिये राह मे ना हो उसको आराम की गर्ज से कहीं भी कयाम नहीं करना चाहिये याद रखो जिस जघा भी क्लब ने आराम किया बस वही उसकी मंजिल ठहरी जजाज ने फिर सवाल किया कि आपके नजदीक तसूफ की बुनियाद किया है आपने जवाब दिया कि तसूफ की असास ये है कि फुकरा से ताल्लुक रखे आजजी से साबित कदम रहें और बखशिश अता पर मूतर्ज ना हो और अमाल सोलेह पर साबित कदम रहे उसका नाम तसूफ है जजाज ने अर्ज किया और तौहीद किया है आपने फरमाया खुदा की मोहब्बत मे इनायत का नाम तौहीद है इसके बाद आपने फरमाया बर और अजीज क्लब आरिफ ऐसा आईना होता है जिस मे हर लम्हा तज़ल्लियात का इनअकास होता रहता है फिर फरमाया जजाज याद रखो कुरबे खुदा वंडी जिस शै का नाम है अगर उसको मालूम करना चाहो तो ये देखो कि दिल मे खुदा के सिवा भी और कुछ है या नहीं और जब ये महसूस करो कि खुदा के सिवा हर शै से नफरत महसूस हो रही है तो समझ लो कि तुम्हें कुर्ब हासिल हो गया,



जजाज के दिल वा दिमाग़ मे आपकी बातें बराहे रास्त असर कर रही थी रोयम ने उनसे पूछा जब जुनेद को तुम्हारे यहाँ आने पर ऐतराज था तो तुम यहाँ कियों आये जजाज ने जवाब दिया कि हजरत मैं झूठ बोलने से रहा ईमानदारी की बात ये है कि जब मैं बगदाद आया तो मैंने ये सोचा कि वापसी पर लोग मुझसे पूछेंगे कि जजाज तुम बगदाद गये इतने दिनों तक रहे मशहूर जमाना सुफिया से भी मिले ये बताओ कि पीरो मुर्शिद रोयम से भी मुलाक़ात हुई या नहीं वोह लोग आपके बारे मे पूछेंगे तो मैं उन्हें किया जवाब दूंगा रोयम ने कहा तुम चाहो तो कुछ देर आराम करो रुक जाओ जजाज तो पहले ही ये चाहते थे फौरन रुक गये रोयम उन्हें छोड़ कर अंदर चले गये और कुछ देर बद जजाज को भी अंदर बुलवाया यहाँ जो मंजर देखने मे आया वोह पहले से बिल्कुल अलग था यहाँ पर रोयम गाव तकिये पर टेक लगाये बड़ी शान से बैठे थे रोयम ने जजाज को देखते ही कहा आये अबु उमरो मैंने सोचा मेरी जुलूट तो तुमने देखली अब मेरी खुलूट भी देखलो इतने मे अंदर से एक छोटी सी लड़की आपके पास आई आपने उसे अपने पास बिठा लिया और उससे इल्मे तौहीद पर बातें करने लगे कुछ देर बाद आपने जजाज से कहा आये अबु उमरो तुम्हारे शैख़ जुनेद कहते हैँ कि मैंने कैसी रोश इख़्तियार करली है और मैंने ये सब कियों ना छोड़ा यहीं वजा है कि मैं उनके पास हाजरी भी नहीं देता अब तुम्ही बताओ मेरे पास इतना वक़्त कहाँ ये बच्चे मेरे पास आते हैँ और मुझसे सवालात करते हैँ मैं उन्हें जवाब देता हू और कोशिश करता हू कि उन्हें ज़ियादा से ज़ियादा बा खबर कर दिया जाये मैं इन बच्चों को इल्मे तौहीद का दर्स देता हू और मैं अपने इस काम को जरुरी समझता हू जजाज ने आपकी बात से कामिल इत्तेफाक किया यहाँ से चल कर जब आप शैख़ जुनेद के पास पहुचे तो वहाँ किसी ने उनके पहुंचने से पहले ही किसी ने बता दिया था कि इस वक़्त जजाज रोयम के पास तशरीफ फरमा हैँ,



शैख जुनेद ने जजाज को अपने रुबरु खड़े देखा तो मुश्कुराते हुऐ कहा कि आसार बता रहे हैँ कि शैख़ रोयम से तुम्हारी मुलाक़ात हो गई है जजाज ने जी कहकर जवाब दे दिया कि मैं उनसे मिलकर आरहा हू जुनेद ने पूछा तो उन्हें कैसा पाया उन्होंने जवाब दिया कि रोयम तो बड़े बुलंद बुजुर्ग हैँ उनकी बातों ने जी खुश कर दिया जुनेद बगदादी ने फरमाया अल्हम्दुलिल्लाह तुमने मुझे खुश कर दिया मैं दिल ही दिल मे खौफ जदा था कि अगर रोयम से मिलकर और उन्हें इस हाल मे देख कर कि वोह गाओ तकिये से टेक लगा कर लोगों से बातें करते हैँ और अगर तुम उनके जाहिर पर उनकी शख्सशियत को जानने लगे तो उसका आखिर किया नतीजा निकलेगा तुम उनकी शख्शियत से बेनियाज और दूर हो जाओगे बस इसी खौफ से मैं तुम्हें वहाँ नहीं जाने देना चाहता था जजाज ने कहा आप मेरे बारे मे ये किया सोच रहे थे जुनेद ने जवाब दिया मैंने जो कुछ सोचा था ऐन बशरियत के मुताबिक था और अगर इस तरह सोच लेते तो अपने जखीरा अमाल को बर्बाद कर लेते अल्हम्दुलिल्लाह तुमने उन्हें खूब देखा वोह वाक़ई बुजुर्ग हैँ,,,

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Thanks for reading: हज़रत अबु रोयम का फिक्र और मर्तबा , Sorry, my Hindi is bad:)

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